Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7

तोप

(पाठ्यपुस्तक से)

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
विरासत में मिली चीज़ों की बड़ी सँभाल क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विरासत में मिली चीज़ों की सँभाल इसलिए की जाती है क्योंकि वे हमारे पूर्वजों व बीते समय की देन होती है। उन चीज़ों से हमें प्राचीन इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है। ये हमारे पूर्वजों की धरोहर है और इनकी रक्षा का भार हम पर होता है। धरोहर हमें हमारी संस्कृति व इतिहास से जोड़ती है। ये हमें हमारे पूर्वजों, परंपराओं, उपलब्धियों आदि से परिचय कराती है। इन्हीं के माध्यम से हम अपनी पुरानी पीढ़ियों से जुड़े रहते हैं। हम उन्हें इसलिए भी सँभालकर रखते हैं ताकि हमारे बच्चों के भविष्य निर्माण का आधार मजबूत बन सके।

प्रश्न 2.
इस कविता में आपको तोप के विषय में क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर
भाव यह है कि समय परिवर्तनशील है। जो तोप कभी अत्यंत ताकतवर हुआ करती थी, आज उसकी दशा दयानीय बन चुकी है अर्थात् अत्याचारी कितना भी ताकतवर क्यों न हो एक दिन उसका अंत होकर ही रहता है। जो तोप शूरमाओं की धज्जियाँ उड़ा देती थी आज वही बच्चों और चिड़ियों के खेलने के साधन से ज्यादा कुछ नहीं है।

प्रश्न 3.
कंपनी बाग में रखी तोप क्या सीख देती है?
उत्तर
कंपनी बाग में रखी तोप यह सीख देती है कि अत्याचारी शक्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, पर उसका अंत अवश्य होता है। मानवशक्ति सबसे प्रबल होती है और वही विजयी होकर रहती है। यह हमें अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य को सँवारने का संदेश देती है। हमें याद रखना होगा कि भविष्य में कोई हमारे देश में पाँव न जमाने पाए और यहाँ फिर वह तांडव न मचे, जिसके घाव अभी तक हमारे दिलों में हरे हैं। कवि हमें यह बताना चाहता है कि कोई कितना भी बलवान और शक्तिशाली क्यों न हो, एक निश्चित अवधि के बाद उसकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है। अर्थात् उसका अंत अवश्य होता है।

प्रश्न 4.
कविता में तोप के दो बार चमकाने की बात की गई है। ये दो अवसर कौन-से होंगे?
उत्तर
कविता में तोप को दो बार चमकाने की बात कही गई है। ये दो अवसर है-

  1. स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त),
  2. गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)

हमारे देश की आजादी के इतिहास में ये दोनों दिन अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इनमें से 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश कों आज़ादी मिली और 26 जनवरी को हमारे देश का अपना संविधान लागू किया गया। ये दोनों ही अवसर हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय महत्त्व और विरासत से जुड़ी वस्तुओं की साफ़-सफ़ाई करके चमकाया जाता है ताकि आने वाली पीढ़ी इनसे प्रेरणा ले सके।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1.
अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप।
उत्तर
भाव-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने स्पष्ट किया है कि सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में प्रयोग की गई तोप हमारी विरासत के रूप में कंपनी बाग के एक कोने में विद्यमान है। अब इस तोप का कोई महत्त्व नहीं रह गया। यह एक प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गई है। कवि उसकी निरर्थकता की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी के युग में वह तोप महत्त्वपूर्ण थी। कितने ही सूरमाओं को इसने मौत की नींद सुला दिया था परंतु आज वह पर्यटकों के देखने में बच्चों की घुड़सवारी करने का साधन मात्र बनकर रह गई है। दिनभर उछल-कूद करनेवाले बच्चों से उसे जरा सी भी फुरसत मिलती है तो उसकी पीठ पर चिड़ियों का डेरा सा जम जाता है और ढेर सारी चिड़ियों का झुंड उसकी पीठ पर इकट्ठा होकर, अपनी चहचहाहट से उसे परेशान करती रहती हैं। जिस तोप की आवाज़ किसी जमाने में अच्छे-अच्छे सूरमाओं के हौसले पस्त कर देती थी वह तोप अब चिड़ियों की गपशप सुनने को विवश है। इसके माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहता है कि समय बलवान होता है। जैसे-जैसे वह चलता है वैसे-वैसे मनुष्य या किसी शक्तिशाली वस्तु की उपयोगिता घटती-बढ़ती रहती है।

प्रश्न 2.
वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।
उत्तर
भाव-कवि ने तोप की दयनीय दशा का चित्रण करते हुए कहा है कि कितना भी बड़ा अत्याचारी क्यों न हो उसके शासन का अंत एक दिन अवश्य होता है। यही कारण है कि तोप इस दयनीय अवस्था में पड़ी हुई है। कंपनी बाग में रखी तोप के अंदर कभी चिड़िया घुस जाती है तो कभी बच्चे उस पर घुड़सवारी का आनंद उठाते हैं। कवि ने इन प्रतीकों के माध्यम से सत्ता के बदलते स्वरूप पर व्यंग्य किया है। कवि बताता है कि समय के आगे किसी की नहीं चलती। चाहे कोई कितना ही बड़ा शक्तिशाली क्रूर शासक हो। एक-न-एक दिन उसका अंत सुनिश्चित है। तब कमजोर-से-कमजोर व्यक्ति भी उसका उपहास उड़ाता है।

प्रश्न 3.
उड़ा दिए थे मैंने
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे।
उत्तर
भाव-कवि इन पंक्तियों में कंपनी बाग में रखी तोप के विषय में बताता है कि उसने बड़े-बड़े योद्धाओं और वीरों को मार गिराया था। वह बहुत जबरदस्त थी, शक्तिशाली थी, उसके आगे कोई नहीं टिक सकता था। ब्रिटिश सेना ने भारतीय देशभक्तों का दमन करने के लिए इसका प्रयोग किया था। यह तोप एक ही समय में बड़े-बड़े सूरमाओं की धज्जियाँ उड़ाने में सक्षम थी। इसने अनेक बेगुनाहों को मौत की नींद सुला दिया था युद्ध में तोप की मौजूदगी शत्रुओं की मौत का कारण बनती थी। आज स्थिति यह है कि छोटे-छोटे बच्चे उसकी पीठ पर घुड़सवारी कर रहे हैं।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
कवि ने इस कविता में शब्दों का सटीक और बेहतरीन प्रयोग किया है। इसकी एक पंक्ति देखिए ‘धर रखी गई है यह 1857 की तोप’ । ‘धर’ शब्द देशज है और कवि ने इसका कई अर्थों में प्रयोग किया है। ‘रखना’, ‘धरोहर’ और ‘संचय’ के रूप में।
उत्तर
विद्यार्थी ध्यानपूर्वक पढ़े।

प्रश्न 2.
‘तोप’ शीर्षक कविता का भाव समझते हुए इसका गद्य में रूपांतरण कीजिए।
उत्तर
कंपनी बाग के मुहाने पर 1857 की तोप को धरोहर के रूप में रखा गया है। जिस प्रकार विरासत में मिले कंपनी बाग को संभालकर रखा जाता है, उसी प्रकार इस तोप को भी साल में दो बारे चमकाया जाता है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को अंग्रेज़ी सरकार ने तोप अर्थात् ताकत के बलबूते पर अवश्य कुचल दिया था, पर अंत में इस सत्ता को यहाँ से जाना पड़ा। अब इस क्रूर सत्ता की प्रतीक यह तोप प्रदर्शन की वस्तु बनकर कंपनी बाग के मुख्य द्वार पर रखी है। इसे बड़ी संभाल कर रखा जाता है ताकि लोग जान सके कि हमारे पूर्वजों ने अपना अमर बलिदान देकर इस तोप से अत्याचार करने वाले शासकों को इस देश से विदा कर दिया। अब इस तोप का प्रयोग बच्चे या पक्षी करते हैं, और वे इससे डरने के स्थान पर इससे खेलते हैं। गौरैयाँ तो इसके मुँह तक में घुस जाती हैं। अब इससे किसी को किसी भी प्रकार का भय नहीं है। यह तोप बताती है कि अन्यायी और ताकतवर का भी एक-न-एक दिन अंत अवश्य होता है।

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